श्री कृष्ण कृपा
विचार मन्थन -विचार जो जीना सीखा दे
बात बात में स्वयं परेशान होने और दुसरो को परेशान करने से
परहेज़ करे |
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आत्म निरिक्षण अवश्य करते रहे |सोने से पूर्व रोज
देखे -मेरा आज का दिन कैसे निकला !
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कर्म का त्याग नही ,त्याग भाव से कर्म करो |
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अच्छा साहित्य पढ़ने का सवभाव बनाएं ! साथ साथ कभी कभी जीवन
के पुस्तक को भी पढ़े |
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विचार ही उठाते हैं और विचार ही गिराते हैं |शुभ विचार जीवन का उत्थान हैं,,अशुभ विचार पतन !
सकारात्मक सोच(पॉजिटिव थिंकिंग) रखें ,नकारात्मक
(नेगेटिव) नही |सोच आशावादी,उत्साहवादी हो,निराशावादी नही !शांति-अशांति इसी पर निर्भर हैं |
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गुणग्राही बने |अवगुणो में भी गुण देखे |अच्छाई का वर्ण करे ,अच्छे बने |
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किसी भी कारण से बुद्धि नही बिगड़े,ऐसा प्रयास करो और भगवान से प्रार्थना भी |
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अच्छा दिखने या कहलवाने के ही आदत नही ,अच्छा बनने का प्रयास करो |अच्छा वही,जिसके कर्म ऊँचे हैं |
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बिज़ली के उपकरण अनेक हैं ,लेकिन उन्हें चलाने वाला करंट एक |रूप रंग वर्ण वर्ग अनेक लेकिन ईश्वरीय चेतना का करंट एक ही !
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कमियाँ अपनी देखो !जब तक अपनी कमी देखने और स्वयं स्वीकारने के आदत नही बनेगी कमी दूर हो ही नही सकती |
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पुरुषार्थी और परमार्थी बन कर जीवन जिओ,प्रमादी और स्वार्थी बनकर नही |
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भाव में कपट ओर स्वभाव में कटुता नही ; सहजता,सरलता भवन को भी अपना बनाती हैं,संसार को भी |
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समुद्र में हीरे-मोती ,जवाहरात का अपार भण्डार हैं |किनारे खड़े रह कर नही प्राप्त होगा |
आवश्यकता हैं भीतर गहरा उतरने की
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चिलम भी मिटटी से बनती हैं ,
सुराही भी |
चिलम ताप्ती हैं ,तपाती हैं |सुराही शीतल रहती
हैं,शीतलता देती हैं |सुराही की तरह बनो,चिलम नही |
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मंत्र जाप एवं ध्यान साधना दवारा भीतर की गहन साम्राज्य में
प्रवेश करो |विश्वाश रखो -भीतर सब कुछ हैं-ऊर्जा,ओज,प्रकाश ,ज्ञान-आनंद |
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उस परमात्मा का साथ कभी नही छोड़ो ,जो कभी साथ नही
छोड़ता |
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जिज्ञासा और विश्वास की कमी ही हमारे कल्याण में सबसे बढ़ी बाधा हैं |
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