श्री कृष्ण कृपा
विचार मन्थन -विचार जो जीना सीखा दे
पहले भजन फिर भोजन |संभव हो तो और दृढ़ता -भजन नही तो भोजन
नही
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गंगा जी की तीव्र प्रवाह को देखो |
तो जल दिख रहा हैं ,वह नही दिख रहा ! आपके देखते ही आगे निकल
गया ,समय की स्थिति भी यही हैं
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प्रातः काल शीघ्र उठकर कुछ समय केवल भजन ध्यान | ' मैं ओर मेरे प्रभु
' और कुछ नही कोई नही | धीरे -धीरे मैं भी नही ,बस तू ही तू ...तू
ही तू |
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सबसे पहला काम -प्रभु का नाम ; फिर हर काम ,प्रभु के नाम !
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घर से बाहर जाते हुए भगवान का स्मरण और घर में प्रवेश करते
हुए भगवान के कृपा का धन्यवाद करते रहो |
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प्रातः काल उठते ही
कृपा का स्मरण करो !आँख भी खुली हैं तो कृपा से ! दिन भर कृपा बनी रहे -ऐसे ही प्रार्थना करो |
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सामर्थ्य प्रभु के दी हुई हैं ,उन्ही की मान
सदुपयोग करो ,दुरूपयोग नही |
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मैं कितना भाग्यशाली हूँ,प्रभु की कितनी
कृपा हैं जो वे मुझसे अपनी सेवा करवा रहे हैं ; यह भाव सेवा में
विनम्रता लाएगा ,आह्लाद बढ़ाएगा
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विनम्रता कमजोरी ,कायरता या हल्कापन नही ;ऊँचे भवन की गहरी
और मजबूत नीव हैं |
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रात्रि शयन से पूर्व परिवार की सभी सदस्य एक बार अवशय इकठ्ठे बैठे |कुछ समय भजन ,कीर्तन ,आरती मिलकर करे |
सुख समृदि ,सदभावना,भक्ति भावना और शुद्ध सात्विक संस्कार परिवार में स्वतः
बढ़ने लगेंगे |
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उदार बनो ,संकीर्ण नही ;सरल बनो ,कठोर नही ;
विनम्र बनो
अहंकारी नही
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क्या लए थे ? क्या लेकर जायंगे ?
यही मिला हैं,यही के लिये मिला हैं |
दुरूपयोग से बचो ,जितना हो सके सदुपयोग कर लो |
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