Monday, 9 November 2015

विचार मन्थन-विचार जो जीना सीखा दे-4

श्री कृष्ण कृपा 
विचार मन्थन -विचार जो जीना सीखा दे
पहले भजन फिर भोजन |संभव हो तो और दृढ़ता -भजन नही तो भोजन नही
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गंगा जी की तीव्र प्रवाह को देखो |
तो जल दिख रहा हैं ,वह नही दिख रहा ! आपके देखते ही आगे निकल गया ,समय की स्थिति भी यही हैं

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प्रातः काल शीघ्र उठकर कुछ समय केवल भजन ध्यान | ' मैं ओर मेरे प्रभु ' और कुछ नही कोई नही | धीरे -धीरे मैं भी नही ,बस तू ही तू ...तू ही तू |

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सबसे पहला काम -प्रभु का नाम ; फिर हर काम ,प्रभु के नाम !

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घर से बाहर जाते हुए भगवान का स्मरण और घर में प्रवेश करते हुए भगवान के कृपा का धन्यवाद करते रहो |

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प्रातः काल उठते ही कृपा का स्मरण करो !आँख भी खुली हैं तो कृपा से ! दिन भर कृपा बनी रहे -ऐसे ही प्रार्थना करो |

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सामर्थ्य प्रभु के दी हुई हैं ,उन्ही की मान सदुपयोग करो ,दुरूपयोग नही |

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मैं कितना भाग्यशाली हूँ,प्रभु की कितनी कृपा हैं जो वे मुझसे अपनी सेवा करवा रहे हैं ; यह भाव सेवा में विनम्रता लाएगा ,आह्लाद बढ़ाएगा

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विनम्रता कमजोरी ,कायरता या हल्कापन नही ;ऊँचे भवन की गहरी और मजबूत नीव हैं |

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रात्रि शयन से पूर्व परिवार की सभी सदस्य एक बार अवशय इकठ्ठे बैठे |कुछ समय भजन ,कीर्तन ,आरती मिलकर करे |
सुख समृदि ,सदभावना,भक्ति भावना और शुद्ध सात्विक संस्कार परिवार में स्वतः बढ़ने लगेंगे |

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उदार बनो ,संकीर्ण नही ;सरल बनो ,कठोर नही ; विनम्र बनो अहंकारी नही
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क्या लए थे ? क्या लेकर जायंगे ?
यही मिला हैं,यही के लिये मिला हैं |
दुरूपयोग से बचो ,जितना हो सके सदुपयोग कर लो |


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