श्री कृष्ण कृपा
विचार मन्थन -विचार जो जीना सीखा दे
संसार आने -जाने वाला हैं,
आने -जाने वाला सुख ही देगा |
सदा रहने वाली शांति चाहते हो तो
सदा रहने वाले परमात्मा में मन लगाओ |
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संसार शारिरिक सुख सुविधाये दे सकता हैं ,मानसिक शांति नही
! मानसिक शांति का आधार परमत्मा हैं |
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शरीर की यात्रा का अंतिम पड़ाव शमशान हैं जीव की यात्रा का
अंतिम पड़ाव भगवान !
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समय की गति न तेज़ होती हैं न कम | समय एक गति से चल
रहा हैं |अंतर इतना हैं ,आनंद की पलो में समय बीतते पता ही नही चलता,दुःख अशांति का एक
मिनट भी भारी एवं लम्बा लगता हैं |
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भोजन 'स्वाद' लेकर नही 'प्रसाद' मान कर खाओ |
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समय की महत्व को समझो,समय आप का महत्व
बढ़ा देगा |
समय का सदुपयोग करने की आदत बनाओ,समय आपको ऊँचा उठा
देगा |
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शरीर की गति स्वतः स्वभावत: श्मशान की ओर हैं |
जीव की गति भगवान की ओर हो,प्रयत्न पुरुषार्थ
तो इस लिये करना हैं |
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आकाश कृष्ण कृपा की छत्रछाया हैं ,वायु उसकी कृपा की
झोंके,जल कृपा की शीतलता,अग्नि कृपा का तेज़ और पृथ्वी कृपा का ही आधार -सर्वत्र कृपा
देखने एवं अनुभव करने का स्वभाव बनाओ |
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सेवा अहसान नही,कर्तव्य की पहचान हैं |प्रदर्शन नही,अहम का समर्पण हैं
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