Monday, 9 November 2015

विचार मन्थन-विचार जो जीना सीखा दे-6

श्री कृष्ण कृपा 
विचार मन्थन -विचार जो जीना सीखा दे
व्यवहार काल में भगवान नही भूले ,लेकिन भगवान की भजन ,साधन में संसार भूल जाये |

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अहंकार का त्याग प्रेम के दिव्य साम्रज्य का प्रवेश दवार हैं

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अपना मन हो या कोई और -अच्छाई की प्रेरणा बने तो मित्र ! बुराई की ओर खींचे तो शत्रु !

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हम वहाँ नही जहां हमारा तन हैं ,वहाँ हैं -जहां मन हैं !व्यवहार करते हुए मन ईश्वरीय भाव में रखें | आप प्रभु में हैं और वह आप में !

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धैर्य और सहनशीलता का पाठ पक्का करो ,ऐसी में शांति और सदभाव् हैं !अधीरता, उतावलापन ,आवेश मानसिक अशांति और पारिवारिक दुर्भावना बढ़ाता हैं ,कार्य कुशलता कम करता हैं |

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लक्ष्य अच्छा ,भाव सच्चा और विश्वाश पक्का -श्री कृष्ण कृपा स्वतः अनुभव होगी

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पढ़ते कमाने के लिये ;कमाते हैं खाने के लिये ;खाते जीने के लिये ;क्या कभी सोचा -जीते हैं किस लिये ?

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बिगड़ी बुद्धि  को सवारे-वह सतसंग | अच्छी भली- बुद्धि को बिगाड़े-वह कुसंग !

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वाणी से निकलने वाला दिन का प्रथम शब्द प्रभु नाम का हो ,सोने से पूर्व दिन के अंतिम शब्द के रूप में प्रभु ही वाणी पर हो |

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प्रेम शत्रु को भी मित्र  बना लेता हैं ,क्रोध मित्र को भी शत्रु |

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नींद के लिये ६ से ८ घंटे ,
दुकान या ऑफिस के लिये ८ से १० घंटे और परमात्मा के लिये इतने  मिनट भी धैर्य एवं एकाग्रता से नही -कहाँ तक उचित हैं ?

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लोक में शांति ओर परलोक में उद्धार केवल परमात्मा का होकर ही संभव हैं,संसार का होकर नही |

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कुसंग से बचो, सतसंग में लगो |
सतसंग उत्थान हैं कुसंग पतन !

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जैसा संग वैसा विचारो का रंग ,जैसे विचार वैसे कर्म ,जैसे कर्म वैसे आदते,जैसे आदते वैसे मनुष्य |इसीलिए कहाँ जाता हैं -मनुष्य के पहचान उसकी संगति से हैं |

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प्रत्येक आने वाला दिन पिछले दिन के अपेक्षा अच्छा हो -ऐसी जागरूकता जीवन को सतत अच्छाई की ओर प्रेरित करती रहेगी |

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ज्ञान का अभिमान नही लेकिन अभिमान का ज्ञान अवशय रहे |

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जीवन चिन्ताओ में रोने, अज्ञानता के नींद सोने ,अनमोल श्वांस व्यर्थ खोने ,कामनाओ का बोझा ढोने के लिये ही नही ,जिस परमत्मा ने जीवन ओर जीवन में सब दिया ,उसका होने के लिये हैं |

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